समदर्शी भगवान् – श्रीमद भागवतम सातवां कांड अध्याय १

समदर्शी भगवान् – श्रीमद भागवतम सातवां कांड अध्याय १

श्रीमद भगवतम के सातवें कांड में पहले दस अध्याय नृसिंह लीला का उल्लेख करते हैं। नृसिंह लीला हमें भक्ति के कई गुह्य राज में दृष्टि डालता है। 

नीचे अध्याय १ का एक तार्किक पृथक्करण है।

भाग १ – श्लोक ७.१.१ – ७.१.३ – परीक्षित महाराज पूछते हैं कि क्या भगवान पक्षपाती हैं?

महाराज परीक्षित, सुखदेव गोस्वामी से यह सवाल उठाते हैं ही क्या भगवान् पक्षपाती हैं? भगवान् ने एक असुर, हिरण्याक्ष, का संहार में देवताओं का साथ क्यों दिया?

भाग २ – श्लोक ७.१.४ – ७.१.१२ – सुखदेव गोस्वामी उत्तर में भगवान् को परम बताते हैं

सुखदेव गोस्वामी उत्तर में भगवान् को परम बताते हैं

भाग ३ – श्लोक ७.१.१३ – ७.१.१५ – सुखदेव गोस्वामी युधिष्ठिर और नारद मुनि के बीच का संवाद का उल्लेख करते हैं

सुखदेव गोस्वामी अपने उत्तर का परंपरा द्वारा प्रमाण देते हैं। वे युधिष्ठिर महाराज और नारद मुनि के बीच का संवाद के बारे में बताना शुरू करते हैं।

भाग ४ – श्लोक ७.१.१ – ६७.१.२१ – युधिष्ठिर नारद मुनि से शिशुपाल की मुक्ति के विषय में पूछते हैं

युधिष्ठिर महाराज शिशुपाल को भगवान् कृष्ण के रूप में विलीन होते देख अचंभित हैं। वे नारद मुनि से पूछते हैं की यह एक अघम पापी के लिए कैसे संभव है।

भाग ५ – श्लोक ७.१.२२ – ७.१.३३ – नारद मुनि, शिशुपाल की मुक्ति का उल्लेख करते हैं

नारद मुनि, युधिष्ठिर महाराज के प्रश्न का उत्तर देते हुए, शिशुपाल की मुक्ति का कारण बताते हैं। नारद मुनि विनयशील होकर अपने को शिशुपाल से नीचे के स्तर पर रखते हैं।

भाग ६ – श्लोक ७.१.३४ – ७.१.३५ – युधिष्ठिर महाराज यह पूछते है कि कैसे भगवान् के दृण भक्त वापिस भौतिक जगत में गिर सकते है

युधिष्ठिर महाराज पूछते हैं कि विष्णु भक्त किस श्राप्बके कारण भौतिक जगत में वापिस आ सकते हैं।

भाग ७ – श्लोक ७.१.३६ – ७.१.४७ – नारद मुनि, जय और विजय की कथा सुनाते हैं

नारद मुनि, जय और विजय की कथा सुनाते हैं

भाग ८ – श्लोक ७.१.४८ – हिरण्यकशिपु, प्रह्लाद से शत्रुवत क्यों था

युधिष्ठिर महाराज आगे पूछते हैं कि हिरण्यकशिपु को अपने पुत्र प्रह्लाद से शत्रुता क्यों थी

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